
कोटा दशहरा मेला
माँ चम्बल के तीर पर सजा हाड़ौती की सांस्कृतिक चेतना का जीवंत अधिष्ठान कोटा का ऐतिहासिक दशहरा मेला लोक-संस्कृति, आस्था और विजय का अद्वितीय महाकुंभ है। यह पर्व केवल अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक नहीं, अपितु भारतीय लोक-कला, शिल्पकला और पारंपरिक उल्लास का वह पावन संगम है, जहाँ इतिहास और आधुनिकता एक साथ सांस लेते हैं। विशालकाय रावण दहन की यह परम्परा हमारी समृद्ध विरासत का गौरवशाली हस्ताक्षर है। लोक कलाओं और उत्सवों से सजी यह माटी आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं को सहेजते हुए हर हृदय में उल्लास का नया दीप प्रज्वलित करती है।

